Sunday, June 8, 2014

सपनोँ के कैनवास पर हर रात
एक चेहरा गढ़ती हैँ आँखेँ

जहाँ पलकोँ का ब्रश कल्पना के रंगोँ मेँ डूबकर 
तुम्हारी श्वेत-श्याम छवि को रंगता है, आकार देता है

और इस तरह से फ़िर
सृजन होता है तुम्हारा.......

-आरती

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