जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Wednesday, June 11, 2014
किसके निशाँ ढूँढता है ऐ मुसाफिर
सफर में ख़ुद ही बनाने होंगे तुझे अपने…
पदचिन्ह।
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आरती
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