जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Sunday, June 8, 2014
साल गिरते रहते हैं, ज़िन्दगी के तोशाखाने से..
यादों का चेहरा बूढ़ा बरगद हो जाता है।।
- [आरती]
(29 Aug 2013)
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