होता है न कभी
कोई गीत गुनगुनाते हुए
अल्फ़ाज़ों का गुम हो जाना...
या कभी पियानो पर उँगलियाँ पड़ते ही
किसी गीत का बुन जाना...
होता है न कभी
नींद में चलते हुए
किसी ख्वाब का खो जाना...
या कभी जागते हुए
उस ख्वाब का सिरा मिल जाना...
होता है न कभी
अकेले में यूँ ही बड़बड़ाना
उसकी तस्वीर से बतियाना...
या कभी उसका हाथ थामे
दूर तक चलते जाना चुपचाप
य़ू ही..बेमतलब...बेमकसद......
होता है न कभी............
(आरती)
१३/३/१४
कोई गीत गुनगुनाते हुए
अल्फ़ाज़ों का गुम हो जाना...
या कभी पियानो पर उँगलियाँ पड़ते ही
किसी गीत का बुन जाना...
होता है न कभी
नींद में चलते हुए
किसी ख्वाब का खो जाना...
या कभी जागते हुए
उस ख्वाब का सिरा मिल जाना...
होता है न कभी
अकेले में यूँ ही बड़बड़ाना
उसकी तस्वीर से बतियाना...
या कभी उसका हाथ थामे
दूर तक चलते जाना चुपचाप
य़ू ही..बेमतलब...बेमकसद......
होता है न कभी............
(आरती)
१३/३/१४
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