Sunday, June 8, 2014

होता है न कभी

होता है न कभी 
कोई गीत गुनगुनाते हुए 
अल्फ़ाज़ों का गुम हो जाना...

या कभी पियानो पर उँगलियाँ पड़ते ही
किसी गीत का बुन जाना...

होता है न कभी 
नींद में चलते हुए 
किसी ख्वाब का खो जाना... 

या कभी जागते हुए
उस ख्वाब का सिरा मिल जाना...

होता है न कभी
अकेले में यूँ ही बड़बड़ाना
उसकी तस्वीर से बतियाना...

या कभी उसका हाथ थामे
दूर तक चलते जाना चुपचाप
य़ू ही..बेमतलब...बेमकसद......

होता है न कभी............

(आरती)
१३/३/१४

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