Sunday, June 8, 2014

प्रेम

प्रेम
उसके लिए स्वेटर बुनते हुए 
सलाईयों पर याद का टिक जाना 
और फन्दों का छूट जाना

प्रेम 
उसकी लिखी नज़्में सुनते हुए 
होंठों का मुस्कराना
और आँखों का छलक जाना

प्रेम
चूल्हे पर चाय चढ़ाकर
भांप में उसका चेहरा बनाना
और बर्तन का जल जाना

प्रेम
चुपके से उसकी डायरी चुराकर
उसमें ख़त रखना
और अपने नाम का ख़त मिल जाना

-(आरती)
१४/२/२०१४

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