प्रेम
उसके लिए स्वेटर बुनते हुए
सलाईयों पर याद का टिक जाना
और फन्दों का छूट जाना
प्रेम
उसकी लिखी नज़्में सुनते हुए
होंठों का मुस्कराना
और आँखों का छलक जाना
प्रेम
चूल्हे पर चाय चढ़ाकर
भांप में उसका चेहरा बनाना
और बर्तन का जल जाना
प्रेम
चुपके से उसकी डायरी चुराकर
उसमें ख़त रखना
और अपने नाम का ख़त मिल जाना
-(आरती)
१४/२/२०१४
उसके लिए स्वेटर बुनते हुए
सलाईयों पर याद का टिक जाना
और फन्दों का छूट जाना
प्रेम
उसकी लिखी नज़्में सुनते हुए
होंठों का मुस्कराना
और आँखों का छलक जाना
प्रेम
चूल्हे पर चाय चढ़ाकर
भांप में उसका चेहरा बनाना
और बर्तन का जल जाना
प्रेम
चुपके से उसकी डायरी चुराकर
उसमें ख़त रखना
और अपने नाम का ख़त मिल जाना
-(आरती)
१४/२/२०१४
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