जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Sunday, June 8, 2014
रज़ाई की सफेद तहोँ मेँ दुबकी
कँपकँपाती दो पलकेँ
पोर-पोर स्मृतियोँ की गँध
साँस-साँस खाली....
-आरती
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment