जब भीड़ में ख़ुद को खो देती हूँ
मैं तुम्हें ढूंढती हूँ
जब वायलिन पर कोई उदास धुन बज रही होती है
मैं तुम्हें सुनती हूँ
जब बारिश के बाद भी पोरें सूखी रह जाएँ
मैं तुम्हें बुनती हूँ
जब चाँद दमकने लगता है रात के चेहरे पर
मैं तुम्हें चुनती हूँ
जब रंग बेरंग लगने लगें कैनवास पर
मैं तुम्हें जन्मती हूँ.......
-आरती
१/३/२०१४
मैं तुम्हें ढूंढती हूँ
जब वायलिन पर कोई उदास धुन बज रही होती है
मैं तुम्हें सुनती हूँ
जब बारिश के बाद भी पोरें सूखी रह जाएँ
मैं तुम्हें बुनती हूँ
जब चाँद दमकने लगता है रात के चेहरे पर
मैं तुम्हें चुनती हूँ
जब रंग बेरंग लगने लगें कैनवास पर
मैं तुम्हें जन्मती हूँ.......
-आरती
१/३/२०१४
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