जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Friday, May 29, 2015
ये ना पूछना कि आँख नम क्योँ है
ये ना पूछना कि आँख नम क्योँ है
बस जो ढलकने लगे गाल पर मोती
थाम लेना कानी उँगली पर अपनी..
(चित्र :आरती)
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