जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Saturday, May 30, 2015
ओस भीगी-सी
तुम्हारे क़दमों को छूकर
जो ओस भीगी-सी ...
हुई थी तर
आज दूब की पलक पर टंगी
सिसक रही है ....
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आरती
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