Sunday, May 24, 2015

एक लड़की थी एक लड़की है

एक लड़की थी
तितली के कानों में बुदबुदाती
उसकी हथेली रंगीन हो जाती

पलकों से सपने आज़ाद करती
नीम अँधेरा जुगनू हो जाता है

नाक के नीचे की कांपती पत्ती खोलती
एक नज़्म गिरती महक उठती रात की रानी

एक लड़की है
तितली की पीठ दिखती है उसे अब
हथेली उसी की तरह खाली है

पलकें बेतरह चुभती हैं अब
सपनो की किरचों से

नीम अँधेरा पसरा रहता है दिन में भी
जुगनू को बोतल में बंद कर ले गया कोई राहगीर

पर रात की रानी अब भी महकती है
नज़्म अब भी गिरती है
बाहर नहीं
उसके भीतर
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आरती




  

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