एक लड़की थी
तितली के कानों में बुदबुदाती
उसकी हथेली रंगीन हो जाती
पलकों से सपने आज़ाद करती
नीम अँधेरा जुगनू हो जाता है
नाक के नीचे की कांपती पत्ती खोलती
एक नज़्म गिरती महक उठती रात की रानी
एक लड़की है
तितली की पीठ दिखती है उसे अब
हथेली उसी की तरह खाली है
पलकें बेतरह चुभती हैं अब
सपनो की किरचों से
नीम अँधेरा पसरा रहता है दिन में भी
जुगनू को बोतल में बंद कर ले गया कोई राहगीर
पर रात की रानी अब भी महकती है
नज़्म अब भी गिरती है
बाहर नहीं
उसके भीतर
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आरती
तितली के कानों में बुदबुदाती
उसकी हथेली रंगीन हो जाती
पलकों से सपने आज़ाद करती
नीम अँधेरा जुगनू हो जाता है
नाक के नीचे की कांपती पत्ती खोलती
एक नज़्म गिरती महक उठती रात की रानी
एक लड़की है
तितली की पीठ दिखती है उसे अब
हथेली उसी की तरह खाली है
पलकें बेतरह चुभती हैं अब
सपनो की किरचों से
नीम अँधेरा पसरा रहता है दिन में भी
जुगनू को बोतल में बंद कर ले गया कोई राहगीर
पर रात की रानी अब भी महकती है
नज़्म अब भी गिरती है
बाहर नहीं
उसके भीतर
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आरती
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