लड़की अपना पहला प्रेम कभी नहीँ भूलती
प्रेम, जिसे महसूसना
हथेली मेँ जुगनु बंद करने जैसा है
एक रौशनी एक नूर
अंदर और बाहर...
हथेली मेँ जुगनु बंद करने जैसा है
एक रौशनी एक नूर
अंदर और बाहर...
पर कभी ये रौशनी अलाव भी हो जाया करती है
फ़िर भी हथेली जलती नहीँ.. अमलतास के फ़ूल हो जाती है
फ़िर भी हथेली जलती नहीँ.. अमलतास के फ़ूल हो जाती है
तुम अपने नाम की ही तरह गहरे हो
मेरे लिए प्रेम की परिभाषा
आगाज़ और अंत तुम ही हो
(आरती)
मेरे लिए प्रेम की परिभाषा
आगाज़ और अंत तुम ही हो
(आरती)
No comments:
Post a Comment