Saturday, April 11, 2015

हर्फ हो जाना चाहती हूँ

जानती हूँ तुम्हारी लिखी नज़्मोँ मेँ 
मेरा चेहरा नहीँ..
मैँ बस तुम्हारे पन्नोँ पर बिखरे..
हर्फ हो जाना चाहती हूँ..
-आरती

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