जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Saturday, April 11, 2015
हर्फ हो जाना चाहती हूँ
जानती हूँ तुम्हारी लिखी नज़्मोँ मेँ
मेरा चेहरा नहीँ..
मैँ बस तुम्हारे पन्नोँ पर बिखरे..
हर्फ हो जाना चाहती हूँ..
-आरती
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