जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Saturday, April 11, 2015
कुछ नदियोँ को समंदर नसीब नहीँ होते
तुम समंदर थे
इसीलिए मैँने चुना नदी होना
भूल गई थी मैँ
कुछ नदियोँ को समंदर नसीब नहीँ होते..
(आरती)
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