जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Monday, April 6, 2015
मुझे रहस्य कहता है..
उदासी का सबब पूछता है
बेचैनी पर मुस्काता है
अजब शख़्स है
ख़ुद अबूझ होकर
मुझे रहस्य कहता है..
(आरती)
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