प्रेम हमेशा से एकतरफा ही रहा है..
उसने कहा था
उसने कहा था
मैँ सोचती रही थी देर तक
आख़िर एकतरफा प्रेम होता ही क्योँ है
आख़िर एकतरफा प्रेम होता ही क्योँ है
फ़िर जाने कब पल्केँ भीँच ली थीँ मैँने
और मन ही मन दुआ की थी
और मन ही मन दुआ की थी
प्रेम तुम जब भी छूना..
एक जोड़ी मन ही छूना..
-आरती
एक जोड़ी मन ही छूना..
-आरती
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