जाने कब ये आँखें अपनी नमी खो दें
इंतज़ार थक कर गिर जाये अपने ही घुटनों पर
जाने कब होठों पर जमी अनकही झर जाए
रिसने लगे पोर पोर से समुद्र
जाने कब छिन जाए कविता से शब्द
शब्द से अहसास....अहसास से नमी
जाने कब ईश्वर की गोद सूनी हो जाए प्रेम से
आदम की प्रार्थनाएँ अनसुनी
जाने कब प्रेम से खो जाएँ अपनी अंतहीन गहराईयाँ
खो दूँ मैं तुम्हे अपने स्वप्न से भी
उससे पहले मैं हाथ पर रख कर फूंक देना चाहूँगी
अपनी आखरी सांस
बुझा देना चाहूँगी अपने भीतर के सभी सूर्य …
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आरती
इंतज़ार थक कर गिर जाये अपने ही घुटनों पर
जाने कब होठों पर जमी अनकही झर जाए
रिसने लगे पोर पोर से समुद्र
जाने कब छिन जाए कविता से शब्द
शब्द से अहसास....अहसास से नमी
जाने कब ईश्वर की गोद सूनी हो जाए प्रेम से
आदम की प्रार्थनाएँ अनसुनी
जाने कब प्रेम से खो जाएँ अपनी अंतहीन गहराईयाँ
खो दूँ मैं तुम्हे अपने स्वप्न से भी
उससे पहले मैं हाथ पर रख कर फूंक देना चाहूँगी
अपनी आखरी सांस
बुझा देना चाहूँगी अपने भीतर के सभी सूर्य …
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आरती
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