जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Monday, April 20, 2015
ये कैसी नाराज़गी है
ये कैसी नाराज़गी है उससे..
ईश्वर की कलाई पर बांध ही आती है हर रोज़
उसके नाम इक दुआ
(आरती)
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