जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Friday, April 17, 2015
आँसू
टूटते तारे की आँख से पिघलता
चाँद है..
आँसू
(आरती)
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