तकिए के बहुत पास रखी स्मृति भी
खो जाया करती है कभी
क्योँकि स्मृति का भाग्य है विस्मृत होना
मुझे आश्चर्य नहीँ कि किसी लम्हे तुम
भुला दो मुझे भी इसी तरह
इसलिए ज़रूरी है आवाज़ देना
आवाज़ एहसास है
जिसे सुना नहीँ
बस महसूसना होता है...
खो जाया करती है कभी
क्योँकि स्मृति का भाग्य है विस्मृत होना
मुझे आश्चर्य नहीँ कि किसी लम्हे तुम
भुला दो मुझे भी इसी तरह
इसलिए ज़रूरी है आवाज़ देना
आवाज़ एहसास है
जिसे सुना नहीँ
बस महसूसना होता है...
-आरती
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