Monday, February 29, 2016

आवाज़ एहसास है

तकिए के बहुत पास रखी स्मृति भी
खो जाया करती है कभी
क्योँकि स्मृति का भाग्य है विस्मृत होना
मुझे आश्चर्य नहीँ कि किसी लम्हे तुम
भुला दो मुझे भी इसी तरह
इसलिए ज़रूरी है आवाज़ देना
आवाज़ एहसास है
जिसे सुना नहीँ
बस महसूसना होता है...
-आरती

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