जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Monday, February 29, 2016
अधूरी ही रही हर प्रेम कविता
सबने प्रेम पर
जाने क्या-क्या लिखा
फ़िर भी अधूरी ही रही
हर प्रेम कविता
(आरती)
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