Monday, February 29, 2016

इंतज़ार का चाँद

तुमने फ़ूँक मारी और बुझा दिया 
आँखोँ की पुतलियोँ मेँ रखा 
उम्मीद का सूरज
पर माथे के ठीक बीच मेँ रखे
इंतज़ार के चाँद को
अमावस क्यूँ नहीँ बुझाती...
(आरती)

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