जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Sunday, March 15, 2015
लम्स
आँख भरी है कब से
बूँदेँ आज़ाद करो ना..
नज़्म रुखी हो चली है
वो लम्स भेजो ना..
(आरती)
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