आँख की कोर मेँ जो अटका है
उँगली की पोर पर जो रखा है
जमा है जो रुमाल की तहोँ मेँ लगीँ
काजल की लकीरोँ के बीच..
क्या कभी पहुँचा हैँ
तुम्हारी पल्कोँ तक भी
वो आंसू...
(आरती)
उँगली की पोर पर जो रखा है
जमा है जो रुमाल की तहोँ मेँ लगीँ
काजल की लकीरोँ के बीच..
क्या कभी पहुँचा हैँ
तुम्हारी पल्कोँ तक भी
वो आंसू...
(आरती)
No comments:
Post a Comment