जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Wednesday, March 4, 2015
ओ रंगरेज़
दाँत से काटे हैँ मोह के धागे
पांव से छीली हैँ
प्रेम की हथेली
ले जा तू अपने रंग सारे..
ओ रंगरेज़..
(आरती)
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