जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Wednesday, March 4, 2015
प्रेम - मीठी मुस्कान
प्रेम
ख़ारी आँखोँ मेँ तैरती
मीठी मुस्कान है।
(आरती)
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment