जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Tuesday, December 1, 2015
बातें
जिस तरह नाटक के अंत में
मंच पर धीरे-धीरे घटती है रौशनी
उसी तरह ख़त्म हो रही हैं
तुम्हारी - मेरी बातें
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आरती
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