जिस तरह कवि अपने भीतर भरने देता है बेचैनी
उसी तरह प्रेम मेँ हारा हुआ शख़्स भरता है अपने भीतर
चू गयी आस्था के क़तरे
इस तरह बची रहती है कविता
और इस तरह बचा रहता है जीवन
-आरती
उसी तरह प्रेम मेँ हारा हुआ शख़्स भरता है अपने भीतर
चू गयी आस्था के क़तरे
इस तरह बची रहती है कविता
और इस तरह बचा रहता है जीवन
-आरती
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