जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Friday, December 18, 2015
केँद्र बिँदू
कुछ नहीँ मेँ
कुछ तो है
तुम्हारी मेरी कहानी का यही
केँद्र बिँदू है
(आरती)
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