जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Wednesday, November 25, 2015
जब लौटना हो मुझ तक
उम्र की सड़क पर
तसल्ली भरी एक शाम ढूँढ लेना
जब-जब लौटना हो मुझ तक
ख़ुद को ढूँढ लेना
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आरती
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