जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Saturday, August 15, 2015
प्रेम ठहरने के लिए होता है
प्रेम ठहरने के लिए होता है न
फिर क्यों पानी की तरह बह जाना था मुझे
यूँ क़तरा-क़तरा
तुम्हारी उँगलियों के बीच से
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आरती
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