Wednesday, July 8, 2015

तुम्हारी स्मृति

मुझमेँ तुम्हारी स्मृति का उतरना
किसी पहाड़ी पर खड़े होकर
नीचे देखने जैसा है
जैसे हारमोनियम की अस्पर्शय धुन का
हवा मेँ चुपचाप बहना
जैसे अदृश्य उँगलियोँ का
पीठ पर कोई कविता लिख जाना
जैसे बोतल मेँ संजोयी पिछली बारिश का
हथेलियोँ से छूट जाना...
-आरती

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