जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Friday, July 17, 2015
एक जोड़ी आँखें
ख़्वाब आज फ़िर ख़ाली थे
पुतलियों पर तुम्हारी शक्ल टांगें
जल रहीं थी एक जोड़ी आँखें
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आरती
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