जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Sunday, July 19, 2015
मृत्यु को प्राप्त
अपने इस खोल को भेदा है मैंने
अपनी ही दीवारें तोड़ी हैं
अभिमन्यु बन नहीं हो सकती मैं हर बार…
मृत्यु को प्राप्त
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आरती
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