Sunday, July 27, 2014















पियानो की मख़मली सफ़ेद-काली धारियों पर
उभर आयी हैं उसकी उँगलियाँ
स्मृति भी जाने कैसे-कैसे चेहरे पहने
छलक ही आती है...
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आरती

2 comments:

  1. आरती! सचमुच आप बहुत अच्छा लिखती हैं। मैं कोई भविष्यवक्ता तो नहीं आरती! लेकिन मेरा यकीन है कि मैं तीस साल बाद की एक सुप्रसिद्ध कवियित्री की पंक्तियों पर प्रतिक्रिया लिख रहा हूं और समय-असमय उससे बातें भी कर लेता हूं। मुझे पता नहीं आरती कि आपको अपनी प्रतिभा का कितना ज्ञान है लेकिन मैं इतना कह सकता हूं कि आप भारत के हिंदी साहित्य की एक ऐसी धरोहर हैं जिस पर आने वाला कल गर्व करेगा। यह मैं नितांत कोरी प्रशंसा नहीं कर रहा, मैं वास्तविकता का बखान कर रहा। मैने पहली बार जब आपकी कविता पढ़ी- रात भर मेंह बरसता रहा और मैं भीगती रही, तो मैं आपकी कल्पना को देखकर हतप्रभ रह गया था। आपमें अपने कल्पनाओं और जज्बातों को उकेरने के लिये शब्द भी हैं और केनवास भी। आप भविष्य की सुप्रसिद्ध रचनाकार और तस्वीरों को उकेरने वाली एक पेंटर हैं।मेरी शुभकामनायें आपके साथ हैं, ईश्वर आपको उंचाईयां दे। सादर -राकेश

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