Saturday, July 12, 2014




















नदी भर गयी है 
बारिश की चंद बूंदों से 

किनारे पे ठहरी थी वो 
बीते सावन से 

बुद्ध की अधखुली आँखों सा धैर्य था
नदी की आँखों में

इंतज़ार को आख़िर 
दम तोड़ना ही था

बादल लौट आया है
पराये देस से

नदी की स्मृति में अब भी ज़िंदा है
एक बारिश जो बीत गयी थी

एक बारिश जो साथ है.……
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आरती

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