नदी भर गयी है
बारिश की चंद बूंदों से
किनारे पे ठहरी थी वो
बीते सावन से
बुद्ध की अधखुली आँखों सा धैर्य था
नदी की आँखों में
इंतज़ार को आख़िर
दम तोड़ना ही था
बादल लौट आया है
पराये देस से
नदी की स्मृति में अब भी ज़िंदा है
एक बारिश जो बीत गयी थी
एक बारिश जो साथ है.……
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आरती
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