Friday, July 17, 2015

एक जोड़ी आँखें

ख़्वाब आज फ़िर ख़ाली थे
पुतलियों पर तुम्हारी शक्ल टांगें
जल रहीं थी एक जोड़ी आँखें
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आरती 

Thursday, July 16, 2015

पनाह

पलकों ने चखा समंदर
 गालों पर बरसी हैं बूँदें
एक दुआ भर ही तो उछाली थी
उस नीली-झीनी चादर की ओर
सच है ! मनमर्ज़ियों के आगे
कहाँ टिका है कोई
किसी दर्द की बारिश में
कहाँ रुका है कोई
भीगना, बहना और डूब जाना
बस ! यही तो लिखा है...
पर मन तो फ़िर भी पनाह ढूंढता है
एक दूसरे मन की
दर्द…
एक दूसरे दर्द की
दुआ...
एक दूसरी दुआ की
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आरती
         

Sunday, July 12, 2015

सही पते

वो इज़हार जो हऴक मेँ डूब गया
वो लफ़्ज़ जो काग़ज़ पर नहीँ गिरे
वो धुन जो किसी गीत मेँ नहीँ ठली
वो चिट्ठियाँ जो जेबोँ मेँ सिलतीँ रहीँ
वो आँखेँ जिसमेँ महबूब का अक्स ना उतरा
वो इंतज़ार जिसे मंज़िल न मिली
वो बारिश जो बहती रही अंदर
क्या कभी मिलेँगेँ इन्हेँ..
अपने सही पते
(आरती)

रोमांच

ढूँढने से ज़्यादा खो जाने मेँ रोमांच है...
(आरती)

Thursday, July 9, 2015

चाँद की मुट्ठी

किसी मुकम्मल चाँद की मुट्ठी..
खोल कर देखना
अमावस की भीगीँ रातेँ मिलेँगीँ
-आरती

Wednesday, July 8, 2015

तुम ही तुम

सांसोँ के स्पन्दन पर
स्मृति का थिरकना
स्मृति की भीगीँ पोरोँ का
आँखोँ मेँ उतर आना
आँखोँ से बहकर
ठिठक जाना रूमाल की कोर पर..
नहीँ! इस यात्रा मेँ तुम..
कहीँ नहीँ थे
इस यात्रा मेँ तुम ही तुम थे..
(आरती)

तुम्हारी स्मृति

मुझमेँ तुम्हारी स्मृति का उतरना
किसी पहाड़ी पर खड़े होकर
नीचे देखने जैसा है
जैसे हारमोनियम की अस्पर्शय धुन का
हवा मेँ चुपचाप बहना
जैसे अदृश्य उँगलियोँ का
पीठ पर कोई कविता लिख जाना
जैसे बोतल मेँ संजोयी पिछली बारिश का
हथेलियोँ से छूट जाना...
-आरती