साल गिरते रहते हैं, ज़िन्दगी के तोशाखाने से.. यादों का चेहरा बूढ़ा बरगद हो जाता है।।
- [आरती] (29 Aug 2013)
ये एक लम्बी सड़क है एक तन्हा रास्ता मुझे अकेले ही चलना है इस पर धूप कड़ी है पर बादलोँ की उम्मीद भी है कई मीलोँ और शहरोँ का फ़ासला सही ज़हनी, रूहानी तौर पर हम हमेशा जुड़े रहेँगे हाँ! ये रास्ता मैँने चुना है मैँ हारूँ या जीतूँ ज़िम्मा.. सिर्फ मेरा है....
-(आरती) (30 Nov 2013)
रज़ाई की सफेद तहोँ मेँ दुबकी
कँपकँपाती दो पलकेँ
पोर-पोर स्मृतियोँ की गँध
साँस-साँस खाली....
-आरती
सपनोँ के कैनवास पर हर रात एक चेहरा गढ़ती हैँ आँखेँ
जहाँ पलकोँ का ब्रश कल्पना के रंगोँ मेँ डूबकर तुम्हारी श्वेत-श्याम छवि को रंगता है, आकार देता है