ज़मीन पर लट्टू घुमाता है वो
कितने सधे हाथों से
कि समय की फिरकी पर
लिपटते जाते हैं दुःख - सुख के धागे
दुःख के धागे माथे पर उभर आते हैं
तो सुख के, होठों से चिपक जाते हैं
इन धागों की गिनती मत करना
कि नाप सको इनका उभरना और चिपकना
हर किसी के बस में नहीं ये
गति का ज्ञान...
--------------
आरती
कितने सधे हाथों से
कि समय की फिरकी पर
लिपटते जाते हैं दुःख - सुख के धागे
दुःख के धागे माथे पर उभर आते हैं
तो सुख के, होठों से चिपक जाते हैं
इन धागों की गिनती मत करना
कि नाप सको इनका उभरना और चिपकना
हर किसी के बस में नहीं ये
गति का ज्ञान...
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आरती
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