जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Wednesday, April 20, 2016
रहने दो
सुनने की तलब कहने की रसम रहने दो
जो बात होंठों पर रुकी है वो बात रहने दो
-आरती
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