जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Thursday, April 21, 2016
आदि और अंत से परे
तुम्हें हार चुकने के बाद भी
क्यूँ ये आँखें वो जगह ढूँढती हैं
जहाँ हमेशा से मैंने होना चाहा था...
जगहें तय होती हैं किरदारों की तरह
ये तय होना, प्रेम कहानियों के सिरे खोलता है
उन्हें आदि और अंत से परे ले जाकर...
-आरती
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