जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Sunday, September 29, 2013
चल लहरों पर चलकर समंदर ढूंढ़ते हैं,
एक सपनों का शहर अपने अंदर भी ढूंढ़ते हैं....
-(चित्र एवं पंक्तियाँ-- आरती)
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