जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Friday, November 13, 2015
कुछ दुखता है
वो आँखोँ मेँ हँसती है
क्या ख़ुशी बहुत है!
या कुछ दुखता है
अंदर ही अंदर
(आरती)
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