जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Saturday, September 26, 2015
सपने के पांव
शब् भर दौड़ता रहा था किसी चेहरे के पीछे..
सुबह सपने के पांव छिले मिले हैँ..
(आरती)
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