स्वप्न में मैं किसी ऐसे द्वीप पर थी
जहाँ शिलाएँ इतनी चिकनी थीं
कि मुश्किल था पाँव के तलवों का टिक पाना
मेरी देह अंतरिक्ष में उड़ते
किसी यान की तरह बह रही थी
ईश्वर मौजूद नहीं था वहाँ
जिसे अपनी नाराज़गी जता सकती
मेरी हथेली में हल्के गुलाबी रंग की एक सीप थी
जिसे एक रेशमी धागे से बाँध रखा था मैंने
जाने क्या था उसमें
क्यों बाँध रखा था मैंने
मैं किसी नीले टुकड़े की तलाश में थी
जिसमें लहरें एक ताल पर आती-जाती हैं
पर किनारे पर बिछी रेत को छूती नहीं
इस तरह किनारे पर बने रेत घर
आबाद रहते हैं हमेशा
एक लम्बी यात्रा के बाद
आख़िर वो नीला टुकड़ा दिखा
मैंने उस गुलाबी सीप को खोला
ख़ाली थी वो
क्यूंकि मुझे उन लहरों में से
बस एक लहर भरनी थी उसमें
ताकि मेहफ़ूज़ रह सके पृथ्वी पर
हर एक रेत घर
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आरती
जहाँ शिलाएँ इतनी चिकनी थीं
कि मुश्किल था पाँव के तलवों का टिक पाना
मेरी देह अंतरिक्ष में उड़ते
किसी यान की तरह बह रही थी
ईश्वर मौजूद नहीं था वहाँ
जिसे अपनी नाराज़गी जता सकती
मेरी हथेली में हल्के गुलाबी रंग की एक सीप थी
जिसे एक रेशमी धागे से बाँध रखा था मैंने
जाने क्या था उसमें
क्यों बाँध रखा था मैंने
मैं किसी नीले टुकड़े की तलाश में थी
जिसमें लहरें एक ताल पर आती-जाती हैं
पर किनारे पर बिछी रेत को छूती नहीं
इस तरह किनारे पर बने रेत घर
आबाद रहते हैं हमेशा
एक लम्बी यात्रा के बाद
आख़िर वो नीला टुकड़ा दिखा
मैंने उस गुलाबी सीप को खोला
ख़ाली थी वो
क्यूंकि मुझे उन लहरों में से
बस एक लहर भरनी थी उसमें
ताकि मेहफ़ूज़ रह सके पृथ्वी पर
हर एक रेत घर
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आरती
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