जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Monday, August 25, 2014
मैं तुम्हे क्यों याद करूँ
कोई ख़ुद को भी याद करता है भला.…
-आरती
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