जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Monday, August 11, 2014
तुम्हारी उम्मीद करना...
नये रास्तोँ पर पुरानी यादेँ ढूँढ़ना है।
-आरती
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