जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Wednesday, October 14, 2015
सूर्य की पहली किरण
मुझे सूर्य की पहली किरण बनकर
छूना है तुम्हेँ
जिस तरह जन्म के बाद
सबसे पहले माँ चूमती है
अपने शिशु का माथा
(आरती)
एक उम्मीद का टुकड़ा
यूँ तो मुन्तज़िर कुछ नहीँ
फ़कत एक उम्मीद का टुकड़ा है
जो बंधा रह गया है
तेरे कहे आख़री हर्फ से
(आरती)
सबसे सुंदर ख़त
दुनिया के सबसे सुंदर ख़त वो थे
जो आँखोँ मेँ पढ़े गए
(आरती)
Sunday, October 4, 2015
टूटना एक स्वभाविक प्रक्रिया है
अबोलेपन की छैनी से तोड़ती रही मैँ
संवाद की सब संभावनायेँ
फ़िर भी बेशिकन रही वक़्त की पेशानी
और हौले से कहा
"टूटना एक स्वभाविक प्रक्रिया है"
(आरती)
Thursday, October 1, 2015
आंसू लिख देना
जब कभी कुछ न कह सको
तो बस..
आंसू लिख देना
(आरती)
एक नयी प्रेम कविता
तुम्हारी चुप्पी
हर क्षण बुदबुदाती है
मेरे कानोँ मेँ
एक नयी प्रेम कविता
(आरती)
शिक़ायत
दर्द को पल्कोँ से गिरने न देना
आँख शिक़ायत करेगी
-आरती
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