जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Thursday, October 1, 2015
एक नयी प्रेम कविता
तुम्हारी चुप्पी
हर क्षण बुदबुदाती है
मेरे कानोँ मेँ
एक नयी प्रेम कविता
(आरती)
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