प्रेम में होना
असल में उन्मुक्क्त होना है
एब्स्ट्रैक्ट पेंटिंग की तरह...
जहाँ चीज़ों के ख़ाके तय नहीं होते
दरअसल ख़ाके हमें बाँधते नहीं, तोड़ते हैं।
टूटन को स्थगित करना, हमें ज़रा और तोड़ता है।
जैसे शब्दों के स्थगन से जन्मी चुप्पी को
होठों से चूमना और उसके मोह में पड़ जाना
हमें निर्मोह कर देता है, शब्दों से
एक प्रश्नचिन्ह के साथ :
क्या शब्दों में किया जा सकता है
चुप्पी का अनुवाद !
----------------
आरती
असल में उन्मुक्क्त होना है
एब्स्ट्रैक्ट पेंटिंग की तरह...
जहाँ चीज़ों के ख़ाके तय नहीं होते
दरअसल ख़ाके हमें बाँधते नहीं, तोड़ते हैं।
टूटन को स्थगित करना, हमें ज़रा और तोड़ता है।
जैसे शब्दों के स्थगन से जन्मी चुप्पी को
होठों से चूमना और उसके मोह में पड़ जाना
हमें निर्मोह कर देता है, शब्दों से
एक प्रश्नचिन्ह के साथ :
क्या शब्दों में किया जा सकता है
चुप्पी का अनुवाद !
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आरती
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