जब आप भरे होते हैं रिक्तता से
और खाली होती है समय की भिंची मुट्ठियाँ
तब उससे बंधी हुई आपकी आश्वस्ति गिरती है
उस बच्चे की आँख से गिरते आंसू की तरह
जिसके होंठ कसकर बंद हैं
इसलिए नहीं कि वो बोलना नहीं जानता
बल्कि इसलिए कि वो बोलना नहीं चाहता
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आरती
और खाली होती है समय की भिंची मुट्ठियाँ
तब उससे बंधी हुई आपकी आश्वस्ति गिरती है
उस बच्चे की आँख से गिरते आंसू की तरह
जिसके होंठ कसकर बंद हैं
इसलिए नहीं कि वो बोलना नहीं जानता
बल्कि इसलिए कि वो बोलना नहीं चाहता
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आरती
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